ANCIENT HISTORY
(प्राचीन इतिहास)
RRB NTPC ANCIENT HISTORY QUESTION
अगर आप RRB NTPC की परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करना चाहते हैं, तो पिछले वर्षों के प्रश्नों का अभ्यास जरूरी है। यह न केवल आपके ज्ञान को मजबूत करता है, बल्कि आपको परीक्षा की रणनीति और समय प्रबंधन सीखने में भी मदद करता है। नीचे RRB NTPC के महत्वपूर्ण प्रश्नों की सूची दी गई है।
121. चोल राजवंश के अंतिम शासक कौन थे ?
(a) राजाराज चोल II
(b) राजेन्द्र चोल III
(c) विजयालय चोल
(d) कुलोतुंग चोल III
Ans. (b) राजेन्द्र चोल III
[RRB NTPC, 28 Apr 2016 (Shift-3) Stage 1st]
Explain :- राजेन्द्र चोल III चोल साम्राज्य के अंतिम प्रमुख शासक माने जाते हैं। वे 13वीं शताब्दी के अंत तक शासन करते रहे। उनके समय में चोल शक्ति काफी कमजोर हो चुकी थी। पांड्य व अन्य दक्षिण भारतीय शक्तियों के उदय से चोल साम्राज्य पतन की ओर गया। उनके बाद चोल वंश का राजनीतिक अस्तित्व समाप्त हो गया।
122. कौन से चोल राजा (Chola King) ने मालदीव के द्वीपों पर दरियाई विजय पाई थी ?
(a) करीकाला
(b) राजाराज
(c) महेन्द्र
(d) विक्रम
Ans. (b) राजाराज
[RRB NTPC, 07 Apr 2016 (Shift-2) Stage 1st]
Explain :- राजाराज चोल I ने अपनी संगठित नौसेना के दम पर मालदीव के द्वीपों पर विजय प्राप्त की। वे चोल साम्राज्य के सबसे शक्तिशाली शासकों में थे। उनकी समुद्री नीति ने चोलों को हिंद महासागर में प्रभावी बनाया। उनके काल में श्रीलंका के कुछ क्षेत्रों पर भी अधिकार किया गया। उनकी विजय नीति ने चोल नौसेना को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।
123. प्रारम्भिक चेर वंशीय (Chera Dynasty) राजाओं ने किन राज्यों पर शासन किया था ?
(a) तमिलनाडु और केरल
(b) बंगाल और उड़ीसा
(c) अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम
(d) महाराष्ट्र और गुजरात
Ans. (a) तमिलनाडु और केरल
[RRB NTPC, 18 Apr 2016 (Shift-2) Stage 1st]
Explain :- चेर वंश दक्षिण भारत के प्राचीन तीन प्रमुख राजवंशों में से एक था। इनका मुख्य शासन क्षेत्र वर्तमान तमिलनाडु और केरल रहा। संगम साहित्य में चेर शासकों का उल्लेख मिलता है। ये व्यापार, मसाले और समुद्री संबंधों के लिए प्रसिद्ध थे। चेरों का सत्ता केंद्र अक्सर पश्चिमी तटीय क्षेत्र रहा।
124. किस भारतीय राजा ने पूर्व-एशिया के कुछ हिस्सों को जीतने के लिए नौसैनिक शक्ति का इस्तेमाल किया था ?
(a) अकबर
(b) कृष्णदेव
(c) राजेनद्र चोल
(d) शिवाजी
Ans. (c) राजेनद्र चोल
[RRB NTPC, 29 Mar 2016 (Shift-1) Stage 1st]
Explain :- राजेन्द्र चोल I ने पहली बार भारतीय उपमहाद्वीप से बाहर बड़े पैमाने पर नौसैनिक अभियान चलाया। उन्होंने दक्षिण-पूर्व और पूर्वी एशिया के कुछ हिस्सों पर अपनी शक्ति का प्रभाव दिखाया। विशेष रूप से श्रीविजय साम्राज्य के विरुद्ध उनका अभियान प्रसिद्ध है (1025 ई.)। उनकी नौसेना उस समय एशिया की सबसे संगठित शक्तियों में थी। चोलों की समुद्री नीति का यह स्वर्णकाल माना जाता है।
125. 9वीं शताब्दी में स्थापित प्रसिद्ध विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना किसने कराई थी ?
(a) सामंत सेन
(b) बल्लाल सेन
(c) धर्मपाल
(d) गोपाल
Ans. (c) धर्मपाल
[RRB NTPC, 09 Feb 2021 (Shift-1) Stage 1st]
Explain :- पाल वंश के शासक धर्मपाल ने 9वीं शताब्दी में विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना कराई। यह बिहार में स्थित एक प्रमुख बौद्ध शिक्षा केंद्र था। यह नालंदा विश्वविद्यालय के समान ख्याति रखता था। यहाँ उच्च स्तर की तांत्रिक और बौद्ध शिक्षा दी जाती थी। विदेशी विद्यार्थी भी यहाँ अध्ययन करने आते थे।
126. सबसे प्रसिद्ध पशुचारण और शिकारी जनजातियों ‘मंगोल’ बसे हुए हैं।
(a) दक्षिण एशिया
(b) अरब प्रायद्वीप
(c) दक्षिण-पूर्वी एशिया
(d) मध्य एशिया
Ans. (d) मध्य एशिया
[RRB NTPC, 23 July 2021 (Shift-2) Stage 1st]
Explain :- मंगोल विश्व की प्रमुख घुमंतू पशुपालक जनजातियों में गिने जाते हैं। इनका मुख्य निवास क्षेत्र मध्य एशिया है। ये घुड़सवारी, तीरंदाजी और शिकार-कौशल के लिए प्रसिद्ध हैं। 13वीं शताब्दी में चंगेज़ खान ने इन्हें एकजुट कर विश्व-विख्यात साम्राज्य बनाया। इनकी जीवनशैली आज भी खानाबदोश परंपराओं पर आधारित है।
127. इनमें से कौन सा राजवंश दक्षिण भारत से संबद्ध नहीं है ?
(a) पाण्ड्य
(b) पाल
(c) सातवाहन
(d) पहल्लव
Ans. (b) पाल
[RRB NTPC, 19 Jan 2017 (Shift-1) Stage 1st]
Explain :- पाल वंश का उदय बंगाल और बिहार क्षेत्र में हुआ था। यह पूरी तरह उत्तर-पूर्वी भारत का शक्तिशाली राजवंश था। इसके प्रमुख शासकों में गोपाल, धर्मपाल और देवपाल शामिल हैं। इसके विपरीत पाण्ड्य, सातवाहन और पहल्लव दक्षिण भारत के प्रमुख राजवंश थे।
इसलिए पाल वंश दक्षिण भारत से संबंधित नहीं माना जाता।
128. पाणिनी संस्कृत के प्रसिद्ध ______ थे।
(a) कवि
(b) उपन्यासकार
(c) व्याकरणाचार्य
(d) लेखक
Ans. (c) व्याकरणाचार्य
[RRB NTPC, 08 Mar 2021 (Shift-1) Stage 1st]
[RRB Group-D, 02 Nov 2018 (Shift-2)]
Explain :- पाणिनी प्राचीन भारत के श्रेष्ठ व्याकरणाचार्य माने जाते हैं। उनकी रचना ‘अष्टाध्यायी’ संस्कृत व्याकरण का आधारग्रंथ है। इसे दुनिया का अत्यंत वैज्ञानिक व्याकरण माना जाता है। उन्होंने भाषा को नियमबद्ध करने की नई पद्धति प्रस्तुत की। उनका योगदान भारतीय भाषाविज्ञान का आधार बन गया।
129. कालिदास द्वारा लिखे गए ‘अभिज्ञान शाकुंतलम में शंकुतला का पुत्र कौन था ?
(a) भरत
(b) विक्रम
(c) प्रदयुम्न
(d) अनिरुद्र
Ans. (a) भरत
[RRB NTPC, 03 Feb 2021 (Shift-1) Stage 1st]
Explain :- कालिदास के नाटक ‘अभिज्ञान शाकुंतलम’ में शंकुतला और राजा दुष्यंत का पुत्र भरत होता है। भरत एक तेजस्वी और वीर बालक के रूप में वर्णित है। कथा के अनुसार भरत से ही ‘भारत’ नाम की उत्पत्ति मानी जाती है। कृति में भरत की बाल्य-वीरता का सुंदर वर्णन है। यह नाटक संस्कृत साहित्य की महान कृतियों में गिना जाता है।
130. नाट्य शास्त्र-पुस्तक भारत के शास्त्रीय नृत्य पर किसके द्वारा लिखी गई थी ?
(a) श्री वेदव्यास
(b) श्री तुलसीदास
(c) भरत मुनि
(d) कश्यप मुनि
Ans. (c) भरत मुनि
[RRB NTPC, 07 Apr 2016 (Shift-1) Stage 1st]
Explain :- नाट्यशास्त्र भारतीय नृत्य, संगीत और रंगमंच का मूल ग्रंथ है। इसे ऋषि भरत मुनि द्वारा रचा गया माना जाता है। यह ग्रंथ लगभग 36 अध्यायों वाला विस्तृत कला-ग्रंथ है। भरतमुनि ने इसमें अभिनय, रस, ताल और मंचन-विधियों का विस्तार से वर्णन किया। भारतीय शास्त्रीय नृत्य-परंपराएँ इसी सिद्धांत पर आधारित हैं।
131. प्रसिद्ध तमिल महाकाव्य मणिमेकलई (Manimekalai) की रचना किसने की थी ?
(a) इलांगो आदिगल
(b) नाथकुतनार
(c) सतनार
(d) त्रोतक्कदेवर
Ans. (c) सतनार
[RRB NTPC, 07 Mar 2021 (Shift-1) Stage 1st]
Explain :- मणिमेकलई तमिल साहित्य का एक महत्वपूर्ण बौद्ध महाकाव्य है। इसकी रचना सतनार ने की थी। काव्य में करुणा, नैतिकता और बौद्ध विचारों का सुंदर चित्रण है। यह शिलप्पदिकारम का परवर्ती ग्रंथ माना जाता है। संगम उत्तरकालीन साहित्य में इसका विशेष स्थान है।
132. निम्नालिखित में से कौन-सी पुस्तक विष्णु शर्मा द्वारा लिखित है ?
(a) अर्थशास्त्र
(b) पंचतंत्र
(c) इंडिका
(d) राजतरंगिणी
Ans. (b) पंचतंत्र
[RRB NTPC, 01 Feb 2021 (Shift-2) Stage 1st]
Explain :- पंचतंत्र प्राचीन भारत का प्रसिद्ध नीति-कथा संग्रह है। इसका उद्देश्य युवाओं को जीवन-नीति सिखाना था। इसे विद्वान विष्णु शर्मा ने लिखा। इसमें पशु-कथाओं के माध्यम से व्यवहारिक ज्ञान दिया गया है। पंचतंत्र का अनुवाद दुनिया की कई भाषाओं में हुआ।
133. ‘मुद्राराक्षस’ नाटक किसने लिखा था ?
(a) सोमदेव
(b) विशाखादत्त
(c) कालीदास
(d) बोधायन
Ans. (b) विशाखादत्त
[RRB NTPC, 27 Jan 2021 (Shift-2) Stage 1st]
Explain :- ‘मुद्राराक्षस’ एक राजनीतिक नाटक है। इसे विशाखादत्त ने लिखा। नाटक चंद्रगुप्त मौर्य, राक्षस और चाणक्य के राजनीतिक संघर्ष पर आधारित है। यह मौर्यकालीन कूटनीति और राजनीति को विस्तार से दिखाता है। संस्कृत नाट्य साहित्य में इसकी अलग पहचान है।
134. साहित्यिक कृति ‘रत्नावली’ किसकी कृति है ?
(a) हर्षवर्द्धन
(b) चाणक्य
(c) शूद्रक
(d) कालिदास
Ans. (a) हर्षवर्द्धन
[RRB NTPC, 15 Feb 2021 (Shift-2) Stage 1st]
Explain :- ‘रत्नावली’ प्राचीन भारतीय नाट्य साहित्य की एक महत्वपूर्ण कृति है। इसके लेखक सम्राट हर्षवर्द्धन हैं। नाटक में प्रेम, सौंदर्य और मानवीय संबंधों का सुंदर प्रसंग प्रस्तुत किया गया है। हर्षवर्धन की अन्य कृतियों में ‘प्रियदर्शिका’ और ‘नागानंद’ भी शामिल हैं। यह कृति उनके साहित्यिक कौशल का प्रमाण है।
135. भारत की महान साहित्यिक कृतियां ‘मेघदूत’ और ‘अभिज्ञान शाकुंतलम’ की रचना किसनें की थी ?
(a) भास
(b) कालिदास
(c) चाणक्य
(d) शूद्रक
Ans. (b) कालिदास
[RRB NTPC, 08 Feb 2021 (Shift-1) Stage 1st]
Explain :- इन दोनों कृतियों के रचयिता महान कवि-नाटककार कालिदास हैं। ‘मेघदूत’ एक संदेशवाहक मेघ की कथा पर आधारित काव्य है। ‘अभिज्ञान शाकुंतलम’ संस्कृत साहित्य की सर्वश्रेष्ठ नाट्य कृति मानी जाती है। कालिदास की रचनाएँ प्रकृति-वर्णन और भावनाओं की सुंदरता के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्हें अक्सर “भारत के शेक्सपियर” भी कहा जाता है।
136. ‘राजतरंगिणी’ (Rajatarangini) के लेखक कौन हैं ?
(a) कालिदास
(b) चंदबरदाई
(c) जयदेव
(d) कल्हण
Ans. (d) कल्हण
[RRB NTPC, 28 Dec 2020 (Shift-1) Stage 1st]
Explain :- राजतरंगिणी कश्मीर के राजाओं के इतिहास पर आधारित ग्रंथ है। इसके लेखक कल्हण, एक प्रसिद्ध इतिहासकार-कवि थे। यह 12वीं शताब्दी में लिखा गया माना जाता है। ग्रंथ में कश्मीर के शासकों का क्रमबद्ध और तथ्यपूर्ण विवरण है। यह भारतीय ऐतिहासिक साहित्य की महत्वपूर्ण कृति है।
137. पंचतंत्र नामक कहानी संग्रह के लेखक का नाम बताइए।
(a) स्कंदगुप्त
(b) वेद शास्त्री
(c) विष्णु गुप्त
(d) विष्णु शर्मा
Ans. (d) विष्णु शर्मा
[RRB NTPC, 10 Feb 2021 (Shift-1) Stage 1st]
Explain :-‘पंचतंत्र’ नीति-कथाओं का एक शिक्षाप्रद संग्रह है। इसे विद्वान विष्णु शर्मा ने युवा राजकुमारों को शिक्षित करने हेतु लिखा। कथाएँ पाँच तंत्रों (भागों) में विभाजित हैं। इनमें जीवन, राजनीति और नैतिकता के व्यावहारिक संदेश मिलते हैं। यह ग्रंथ सदियों से लोकप्रिय है।
138. ‘महाभारत’ नामक संस्कृत महाकाव्य के लेखक कौन थे ?
(a) महर्षि वेद व्यास
(b) महर्षि वाल्मीकि
(c) श्री कृष्ण
(d) श्री सुखदेवजी
Ans. (a) महर्षि वेद व्यास
[RRB NTPC, 14 Mar 2021 (Shift-1) Stage 1st]
Explain :- महाभारत दुनिया का सबसे विस्तृत संस्कृत महाकाव्य है। इसके रचयिता महर्षि वेद व्यास हैं। यह कुरुक्षेत्र युद्ध, नीति, धर्म और आदर्शों पर आधारित है। काव्य में 18 पर्व और लगभग एक लाख श्लोक हैं। इसे “पंचम वेद” भी कहा जाता है।
139. आर्यभट्टीयम नामक पुस्तक आर्यभट्ट ने किस भाषा में लिखी थी ?
(a) तेलुगू
(b) तमिल
(c) हिंदी
(d) संस्कृत
Ans. (d) संस्कृत
[RRB NTPC, 08 Mar 2021 (Shift-1) Stage 1st]
Explain :- महान गणितज्ञ-खगोलशास्त्री आर्यभट्ट ने ‘आर्यभट्टीयम’ की रचना की। यह कृति पूर्णतः संस्कृत भाषा में लिखी गई है। इसमें गणित, बीजगणित और खगोल के महत्वपूर्ण सिद्धांत शामिल हैं। आर्यभट्ट के ‘शून्य’ और ‘पाई’ संबंधी विचार इसी ग्रंथ में मिलते हैं। यह भारतीय विज्ञान की आधारभूत पुस्तक मानी जाती है।
140. प्राचीन संस्कृत ग्रंथ, अष्टाध्यायी के लेखक कौन हैं ?
(a) पतंजलि
(b) पाणिनि
(c) अष्टावक्र
(d) चरक
Ans. (b) पाणिनि
[RRB NTPC, 07 Apr 2021 (Shift-1) Stage 1st]
Explain :- ‘अष्टाध्यायी’ संस्कृत व्याकरण का सबसे महत्वपूर्ण और वैज्ञानिक ग्रंथ है। इसके रचयिता प्राचीन व्याकरणाचार्य पाणिनि हैं। ग्रंथ को आठ अध्यायों में व्यवस्थित किया गया है। इसमें भाषा के ध्वनि, रूप और नियमों का विस्तृत विश्लेषण मिलता है। दुनिया के भाषावैज्ञानिक आज भी इसे आदर्श मानते हैं।
141. ‘सुश्रुत संहिता’ किस विषय से संबंधित है ?
(a) ज्योतिष शास्त्र
(b) चिकित्सा एंव शल्य-चिकित्सा
(c) गणित
(d) धर्म एवं पुराण-शास्त्र
Ans. (b) चिकित्सा एंव शल्य-चिकित्सा
[RRB NTPC, 07 Apr 2021 (Shift-1) Stage 1st]
Explain :- ‘सुश्रुत संहिता’ प्राचीन भारतीय आयुर्वेद और शल्य-चिकित्सा का मूल ग्रंथ है। इसके लेखक आचार्य सुश्रुत को “शल्य-चिकित्सा का जनक” कहा जाता है। ग्रंथ में 300+ शल्य-प्रक्रियाओं और कई उपकरणों का वर्णन है। यह चिकित्सा विज्ञान के शुरुआती वैज्ञानिक दस्तावेजों में से एक है। आयुर्वेद के शल्य-चिकित्सा भाग का आधार इसी ग्रंथ को माना जाता है।
142. प्रसिद्ध संस्कृत नाटक ‘स्वप्नवासवदत्तम’ किसने लिखा था ?
(a) जयदेव
(b) कालिदास
(c) शूद्रक
(d) भास
Ans. (d) भास
[RRB NTPC, 19 Jan 2021 (Shift-1) Stage 1st]
Explain :- ‘स्वप्नवासवदत्तम’ प्राचीन संस्कृत रंगमंच की प्रसिद्ध कृति है। इसके लेखक भास हैं, जो आरंभिक संस्कृत नाटककारों में गिने जाते हैं। नाटक में राजा उदयन और रानी वासवदत्ता की कथा है। भास के नाटकों की भाषा सरल तथा भावप्रधान है। भारतीय नाट्य परंपरा में यह नाटक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
143. महाभारत का मूल नाम क्या है ?
(a) भृगु संहिता
(b) सुश्रुत संहिता
(c) जय संहिता
(d) शिव संहिता
Ans. (c) जय संहिता
[RRB NTPC, 15 Mar 2021 (Shift-1) Stage 1st]
Explain :- महाभारत का प्रारंभिक रूप ‘जय संहिता’ कहलाता था। इसे महर्षि वेद व्यास ने रचा। बाद में यह क्रमशः ‘भारत’ और ‘महाभारत’ के रूप में विस्तृत हुआ। इस मूल रूप में केवल युद्ध और धर्म का सार था। समय के साथ इसमें कथाएँ, उपदेश और व्यापक सामग्री जोड़ी गई।
144. ‘दशकुमारचरित’ या ‘टेल्स ऑफ टेन प्रिंसेस’ की रच किसने की थी ?
(a) रहस बिहारी द्विवेदी
(b) दण्डी
(c) भर्तृहरि
(d) बुद्धस्वामी
Ans. (b) दण्डी
[RRB NTPC, 05 Feb 2021 (Shift-1) Stage 1st]
Explain :- ‘दशकुमारचरित’ संस्कृत साहित्य की प्रसिद्ध गद्य-कृति है। इसके लेखक दण्डी हैं, जो प्राचीन कवि एवं गद्यकार थे। कृति में दस राजकुमारों के साहसिक और रोचक प्रसंगों का वर्णन है। यह गद्य-साहित्य की श्रेष्ठ कृतियों में मानी जाती है। दण्डी की भाषा शैली परिष्कृत और आकर्षक है।
145. हर्षचरित का लेखक कौन है ?
(a) कालिदास
(b) पाणिनि
(c) कल्हण
(d) बाणभट्ट
Ans. (d) बाणभट्ट
[RRB NTPC, 31 Jan 2021 (Shift-1) Stage 1st]
Explain :- ‘हर्षचरित’ सम्राट हर्षवर्धन की जीवनी पर आधारित कृति है। इसके लेखक बाणभट्ट, हर्ष के राजकवि थे। कृति में हर्ष के राजकीय, सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का वर्णन है। यह संस्कृत साहित्य की प्रथम विस्तृत जीवनी मानी जाती है। बाणभट्ट की अलंकारिक शैली इसे विशेष बनाती है।
146. गीत गोविंद किसने लिखा था ?
(a) जयदेव
(b) मीराबाई
(c) रसखान
(d) सूरदास
Ans. (a) जयदेव
[RRB NTPC, 29 Dec 2021 (Shift-2) Stage 1st]
Explain :- ‘गीत गोविंद’ भक्ति-काल की अमर कृति है। इसे कवि जयदेव ने लिखा। कृति में राधा-कृष्ण के प्रेम, भक्ति और माधुर्य का सुंदर वर्णन है। यह भारतीय संगीत और नृत्य परंपरा का आधार माना जाता है। इसका प्रभाव ओडिसी और भरतनाट्यम जैसे नृत्यों में स्पष्ट दिखता है।
147. ‘किताब-उल- हिंद’ इनमें से किस यात्री एवं विद्वान की कृति है ?
(a) ड्यूआर्टे बारबोसा
(b) सइदी अली रईस
(c) अलबरूनी
(d) इब्न बतूता
Ans. (c) अलबरूनी
[RRB NTPC, 09 Feb 2021 (Shift-1) Stage 1st]
Explain :- ‘किताब-उल-हिंद’ अरब विद्वान अलबरूनी की प्रसिद्ध कृति है। उन्होंने महमूद गजनी के साथ भारत यात्रा की। कृति में भारत के धर्म, समाज, विज्ञान, गणित और संस्कृति का विस्तृत अध्ययन है। यह भारत पर लिखे गए शुरुआती वैज्ञानिक विवरणों में से एक है। अलबरूनी ने इसे निष्पक्ष दृष्टिकोण से लिखा।
148. निम्नलिखित में से किस प्राचीन भारतीय दार्शनिक ने पदार्थ के सूक्ष्मतम कण के बारे में उल्लेख किया और इसे परमाणु नाम दिया।
(a) चरक
(b) कणाद
(c) बौधायन
(d) वराहमिहिर
Ans. (b) कणाद
[RRB NTPC, 11 Mar 2021 (Shift-2) Stage 1st]
Explain :- प्राचीन भारतीय दार्शनिक कणाद ने परमाणु (सूक्ष्मतम कण) की अवधारणा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि ब्रह्मांड के पदार्थ अत्यंत छोटे अविभाज्य कणों से बने हैं। यह विचार वैशेषिक दर्शन का मुख्य आधार बना। उनका सिद्धांत आधुनिक एटॉमिक थ्योरी से मिलता-जुलता है। भारतीय दर्शन में उनका स्थान महत्वपूर्ण है।
149. ‘मृच्छकटिक’ नामक साहित्यिक कृति के लेखक कौन थे ?
(a) श्री हर्ष
(b) कालिदास
(c) चाणक्य
(d) शूद्रक
Ans. (d) शूद्रक
[RRB NTPC, 30 Dec 2020 (Shift-1) Stage 1st]
[RRB NTPC, 12 Mar 2021 (Shift-1) Stage 1st]
Explain :- ‘मृच्छकटिक’ (अर्थात् ‘मिट्टी की गाड़ी’) संस्कृत का प्रसिद्ध नाटक है। इसके लेखक शूद्रक माने जाते हैं। नाटक में चारुदत्त और वसंतसेना की कथा है। यह सामाजिक जीवन, हास्य, प्रेम और राजनीति का मिश्रण है। संस्कृत नाटकों में इसका विशेष स्थान है।
150. पंच-सिद्धान्तिका, बृहत्संहिता और सांख्य-सिद्धान्त के लेखक कौन हैं ?
(a) आर्यभट्ट
(b) ब्रह्मगुप्त
(c) भास्कराचार्य
(d) वराहमिहिर
Ans. (d) वराहमिहिर
[RRB NTPC, 31 Mar 2016 (Shift-3) Stage 1st]
Explain :- वराहमिहिर प्राचीन भारत के महान खगोलविद और ज्योतिषाचार्य थे। उन्होंने ‘पंच-सिद्धान्तिका’, ‘बृहत्संहिता’ और ‘सांख्य-सिद्धांत’ जैसी प्रमुख कृतियाँ लिखीं। इन कृतियों में ग्रहों, नक्षत्रों, समय-गणना और ज्योतिषीय सिद्धांतों का वर्णन है। उनका कार्य भारतीय खगोल विज्ञान की आधारशिला माना जाता है। वे गु्प्त काल के प्रमुख वैज्ञानिक थे।
